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Happy Birthday Adarsh Ji

जन्मदिवस है आज आपका ,करें बधाई को स्वीकार...
हमें तो पार्टी अभी चाहिये , ये तो अपना है अधिकार।।
जुग-जुग जीयें हमारे जीजा, ईश्वर से करते मनुहार...
सदा लुटाते रहें सभी पर, अपना निश्छल लाड दुलार।।

पता किया तो पता चला, के उम्र हुई अब ३5 साल...
किन्तु अभी भी बालक दिल से, देखो इनके रक्तिम गाल।।
जीवों की परवाह ये करते, हरियाली से करते प्रीत...
जन सेवा भी करते रहते, निभा रहे जंगल से प्रीत।।

आदर्शों की बात न पूछो, अपना नाम करें साकार...
पलभर में अपना कर लेते, ऐसा इनका सद्व्यवहार।।
यही कामना हम हैं करते, आप सदा रहिये खुशहाल...
रहे सफलता कदम चूमती, तन मन धन से मालामाल।। By-Doc Ravi

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‘‘हाथ से सिगरेट छूट गई......’’

‘‘हाथ से सिगरेट छूट गई......’’
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‘‘अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को तम्बाकू या तम्बाकू से बने पदार्थ बेचना दंडनीय अपराध है।’’शहर में पान की दुकानों पर यह तख़्ती लगी थी। स्कूल के छोकरे सिगरेट पीना चाह रहे थे।
‘‘ओए, जा ले आ सिगरेट।’’
‘‘मैं नहीं जाता। पान वाला नहीं देगा।’’
‘‘अबे, कह देना, पापा ने मँगाई है।’’
‘‘स्कूल में.....?’’
‘‘चलो, शाम को नुक्कड़ पर मिलेंगे।’’
‘‘ठीक है।’’
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‘‘भइया, एक सिगरेट का पैकेट देना। हाँ, गुटखा भी।’’
‘‘बच्चे, तुम तो बहुत छोटे हो। तुम्हें नहीं मिल सकता।’’
‘‘अंकल, मेरे पापा ने मंगवाई है। ये लो पैसे।’’
‘‘ओह! तुम तो शुक्ला साब के बेटे हो।’’
पान वाले ने सहर्ष उसे सामान दे दिया।
कुछ दिन बाद....।
‘‘राम–राम शुक्ला जी।’’
‘‘लीजिए साब। आजकल बेटे से बहुत सिगरेट मँगाने लगे हो। हर रोज शाम को आ जाता है।’’
सुनकर शुक्ला साब के हाथ से सिगरेट छूट गई......।

हे मनु के वंशज, तुम कब सुधरोगे?

जो छुपा ले गरीब के गम को,
हमने तो वो इंसान नहीं देखे..!!
कैसे जाती है बात घर से बाहर,
हमने तो दीवार के कान नहीं देखे..!!
मिटा दे जो सदियों की दुश्मनी दिलो से,
हमने तो वो गीता वो कुरान नहीं देखे..!!
अरे अभी भी संभल जाओ बद-दिमागों,
दावा करो होश की,
क्या सब के सर एक ही आसमान नहीं देखे..!!
न पकाओ नफरत की आग पे स्वार्थ की रोटी,इंसानियत रहने दो,
इस आग में जलते हुए मकान नहीं देखे..!!