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Showing posts from January, 2012

Hindustaan Ke Sachhe Sapoot Ka JanmDin Aap Sabko Mubaarak Ho... #JaiHind

Wishing A Very #HappyBirthDay To My Role Model, Organizer Of #AzadHindFauj & A Great Patriot Of India
Born: January 23, 1897
Died: August 18, 1945 (For Me Not Yet)
Achievements: Passed Indian Civil Services Exam; elected Congress President in 1938 and 1939; formed a new party All India Forward block; organized Azad Hind Fauj to overthrow British Empire from India.

Subhas Chandra Bose, affectionately called as Netaji, was one of the most prominent leaders of Indian freedom struggle. Though Mahatma Gandhi and Jawaharlal Nehru have garnered much of the credit for successful culmination of Indian freedom struggle, the contribution of Subash Chandra Bose is no less. He has been denied his rightful place in the annals of Indian history. He founded Indian National Army (Azad Hind Fauj) to overthrow British Empire from India and came to acquire legendary status among Indian masses.

कुछ सवाल आप से..--

"""उत्तर प्रदेश.."""
"एक ऐसा राज्य जहाँ गंगा और यमुना धरती सीचती हैं,,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ बाढ़ के पानी में लोगों का भविष्य हर साल डूबता है..?"

"एक ऐसा राज्य जो देश भर को अनाज देने की छमता रखता है,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ का अन्नदाता अपनी भूख गोलियों से मिटाता है..?"

"एक ऐसा राज्य जहाँ संस्कृतियाँ अपना बसेरा बनती हैं,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ के गाँव अब शहर की जुग्गियों में अपना बसेरा खोज रहे हैं..?"

"एक ऐसा राज्य जिसने सदियों से दुनिया को शिक्षा दी,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ की शिक्षा आज खुद भिक्षा मांगने को मजबूर है..?"

"एक ऐसा राज्य जहाँ के उद्योग धंधे कभी देश का जीवन थे,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ कुटीर उद्योग भी आखिरी साँसे गिन रहे हैं..??"

क्या ये देखकर आपको गर्व महसूस होता है??? नहीं ना...
इसीलिए कहता हूँ, चुनाव धर्म या जाती के आधार पर न करें.. इंसानियत और राष्ट्र भक्ति को महत्त्व दें..!!

हे मनु के वंशज, तुम कब सुधरोगे?

जो छुपा ले गरीब के गम को,
हमने तो वो इंसान नहीं देखे..!!
कैसे जाती है बात घर से बाहर,
हमने तो दीवार के कान नहीं देखे..!!
मिटा दे जो सदियों की दुश्मनी दिलो से,
हमने तो वो गीता वो कुरान नहीं देखे..!!
अरे अभी भी संभल जाओ बद-दिमागों,
दावा करो होश की,
क्या सब के सर एक ही आसमान नहीं देखे..!!
न पकाओ नफरत की आग पे स्वार्थ की रोटी,इंसानियत रहने दो,
इस आग में जलते हुए मकान नहीं देखे..!!