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Showing posts from 2012

लड़कियों की परिभाषा- "एक हास्य व्यंग"

दुनियां को अजब रंग, दिखाती हैं लड़कियाँ
मर्दों को उंगली पर, नचाती हैं लड़कियाँ
कपड़ों के बदलते फैशन से, लगती हैं जैसे
दर्जियों के कारोबार, चलाती हैं लड़कियाँ

मेकअप बगैर कहीं भी, दिखती नहीं हैं अब तो
चेहरे पे एक चेहरा, चढ़ाती हैं लड़कियाँ
बुढियां भी कम नहीं हैं, करती हैं खूब तमाशा,
बाल कटा-कटा कर, कहलाती हैं लड़कियाँ

दुनिया के हर टॉपिक पे, करवालो इनसे बातें
बोलने में कब मात, खाती हैं लड़कियाँ
देख-देख के एक दूसरे को, होती है इनको जैलस
तारीफ किसी और की, कहाँ कर पाती हैं लड़कियाँ

एक्टिंग करने में कोई, सानी नहीं है इनका
एक्टरों को भी पीछे, छोड़ जाती हैं लड़कियाँ
छोटी-छोटी बातों पर, ये हो कर नाराज़
मगरमच्छ के आंसू, बहाती हैं लड़कियाँ

तमन्ना यही रहती है, के हो जाए शादी
रोने का मात्र ड्रामा, रचाती हैं लड़कियाँ
दिन-रात ताने देकर, सर पे करें ये तांडव
मर्दों को भी गंजा, बनाती हैं लड़कियाँ

रिश्तों की दूरियों को, किलोमीटरों बढ़ाएं
ये आग कुछ ऐसी, भड़काती हैं लड़कियाँ
सोचकर लिख "रवि", न लेना इनसे पंगा
अच्छे अच्छों को नाको-चने, चाबवाती हैं लड़कियाँ...!! BY- (Doc Ravi Pratap Singh)

आओ कुछ देर हँसते हैं

आओ कुछ देर हँसते हैं,मोहब्बत पर इनायत पर…
ये बे-बुनियाद बातें हैं, सभी रिश्ते सभी नाते…

कहीं कोई नहीं मरता, किसी के वास्ते जाना,
ये सब है फेर लफ्ज़ों का, है सारा खेल जस्बों का..

नहीं महबूब कोई भी,सभी जुमले से कसते हैं…
उसी को याद करते हैं, आओ कुछ देर हँसते हैं..

सांस लेना भी बिन जिसके, हमें इक जुर्म लगता था,
हुस्न उसका स्वर्ण जैसा, बला का तेज़ लगता था…

जो साया बन के रहता था,जुदा अब उस के रस्ते हैं..
आओ कुछ देर हस्ते हैं, आओ कुछ देर हस्ते हैं...!!


"मेरी व्यथा-कथा"

दो दिन पहले की बात बताऊँ,
सबको अपनी व्यथा सुनाऊं,,
हम बाल कटाने गए दुकान,
भरपूर दिया नई ने सम्मान,,

बोला-"बैठो भाई जान,
किस तरह होगा कटिंग का काम,,"
हमने बोला-"करो उस-तरह,
पहले कटवाए थे जिस तरह,,"

वो ससुरा कुछ अनपढ़ ठहरा,
था शायद एक कान से बहरा,,
उस-तरह को समझ उस्तरा,
सर पे मेरे फेर दिया उस्तरा,,
अब गंजे होकर लौटे हैं,
और चादर तान के सोते हैं,,
तब तक शकल किसे दिखलायें,
जब तक बाल ये उग न जाएँ..!!

By-( Doc Ravi Pratap Singh )

"एक बेटी"

बड़ी मन्नतों के बाद किसी के, घर में आती है एक बेटी,
कभी मुस्काकर कभी तुतलाकर, रौनक फैलाती है एक बेटी,,
फ्रॉक पहन माथे पर बिंदी, छम-छम करके चलती बेटी,
पल भर में सब तोड़ खिलौने, घर-घर खेला करती बेटी,,
माँ-बाबा दादा-दादी की, सबकी यही चहेती बेटी,
रोज़ नए खेलों से अपने, सपने कई दिखाती बेटी,,

कब ये वक़्त फिसल जाता है, पढने जाने लगती बेटी,
राजकुमार मिलने के सपने, दिल में सजाने लगती बेटी,,
पिता की चिंता बढ़ जाती है, घर में एक सायानी बेटी,
माँ-बाबा की इज्जत अरमानो को,रखे संजो के रानी बेटी,,

पिता करे वादा बेटी से, अपने से अच्छा घर ढूढेंगे,
माँ दिलासा देती है कह कर, सौ में एक अनोखा वर ढूढेंगे,,
होत दिखाई जब बेटी की, नहीं पसंद आने का डर,
पसंद अगर आ भी जाये तो, मांग बड़ी होने का डर,,
सभी डरों से मुक्त होते ही, बहू किसी की बन जाती बेटी,
बाबुल का घर छोड़ के अब तो, नया घरोंदा बनाती बेटी,,

दूजे के घर को अपना करने, लेके विदा चली जाती बेटी,
घर सूना है द्वार है सूना, यादो में रह जाती बेटी,,
वक़्त के साथ बदलता पहलु, पिता जी नाना बन जाते,
वही चहल-पहल फिर आती है, जब बेटी संग आती बेटी..!! By-( Doc Ravi Pratap Singh)

आँसू रिश्ते और ख्वाब....

प्रिय मित्रों, आँसू रिश्ते और ख्वाब,,टूटते हैं लेकिन छूटते नहीं..!!
वो जो दर्द दफ़न किया था, दिल की गहरी खाइयों में,,
आज फिर दिखने लगा है, मेरी ही परछाइयों में..!!
एक सच जो न पिया जाता है, न उगला जाता है,,
लाख रोकने के बावजूद, गले तक चला आ जाता है..!!
आज फिर से ये लावा बनकर उबल रहा है,,
सुनामी की लहरों की मानिंद मचल रहा है..!!
फिर वही वीरान रातें आ खड़ी हैं उजाले की आस में,,
फिर वैसे ही भटक रहा हूँ एक नींद की तलाश में..!!
फिर ये कमीना दिल दोगला हो गया है,,
प्यार बाँटते-बाँटते शायद खोखला हो गया है..!!
कभी तो मीठे आश्वासनों से मुझे तसल्ली देता है,,
और कभी-कभी कमबख्त सब सच उगल देता है...!!
माँ, आज फिर तेरे प्यार की दरकार है,,
तुझसे दो बूँद भी मिले तो स्वीकार है..!!
ये तेरा प्रेम ही तो है..
जिसने हर हालात में जीना सिखा दिया,
घाव कैसा भी हो, उसे सीना सिखा दिया..!!
ये तेरा प्रेम ही तो है..
जिसने मेरी रूह को मुझसे मिला दिया,
मेरी रूकती हुयी साँसों को फिर से चला दिया..!!
जानता हूँ मजबूरी तेरी, पर यूँ न मुझपर कहर बरसा,,
मुझसे चाहे बात न कर, पर प्यार के लिए और मत तरसा...!!

आंसू

आज मैंने अपने आंसुओं को बहुत समझाया,
"क्यों भरी महफ़िल में तुमने फिर मुझे सताया,,
अच्छे लगते हो तुम जब भी तन्हाई में आते हो,
लेकिन भरी महफ़िल आकर मेरा मजाक क्यों बनाते हो,,!!"

इसपर तड़पकर आंसुओं ने भी मुह खोला,
थोडा सिसकते हुए एक आंसू बोला..

"हर वक़्त भावना-विहीन लोगों से घिरे रहना,
शोभा नहीं देता ऐसी भीड़ को महफ़िल कहना,,
आप अपना समझकर लोगों को जब व्यथा बताते हैं,
लोग उसे मनोरंजन समझकर तालियाँ बजाते हैं,,
ऐसी महफ़िल में जब भी आपको तनहा पाते हैं,
ना चाहते हुए भी आपके पास चले आते हैं..!!"
By- (Doc Ravi Pratap Singh)

नेता प्रकृति

कह रवि नेता प्रकृति, छोड़े कभी न ढंग,,
जीत के बाद ही दिखता है, नेता का असली रंग..
नेता का असली रंग, नियत है इनकी खोटी,,
मौका मिलने पर बेचें, मजदूरों की रोटी..
अपने नेता अच्छे हैं, नहीं है उनमें खोट,,
उल्लू हैं हम लोग ही, जो देते उनको वोट.. घूस बिना न काम करें, दिखते हैं लाचार,,
पैसे से इन्हें मिले एनर्जी, नस-नस में भ्रष्टाचार..!! By- Dr.Ravi (Diamond_Sword)

तब मैं कविता लिखता हूँ

जब देह बिके और रौंदी जाये रोटी के आभाव में,,
जब बीते कोई बचपन ढाबों पर शिक्षा के आभाव में,,
हाँ तब मैं कविता लिखता हूँ,
तब-तब मैं कविता लिखता हूँ..
जब सच कहने पर होती जेल, अपराधियों को मिलती बेल,,
भूखों की रोटी पर होता जब-जब ये सत्ता का खेल,,
हाँ तब मैं कविता लिखता हूँ,
तब तब मैं कविता लिखता हूँ..
जब ज्ञानी करते अज्ञान की बातें,और ढोंगी बाँटें टीवी पर ज्ञान,,
जब मेहनत मजदूरी करे अपाहिज,और दिखे भिखारी कोई नौजवान,,
हाँ तब मैं कविता लिखता हूँ,
तब तब मैं कविता लिखता हूँ..
जब गाँव कोई शहरों की झुग्गी में, नित्य बसेरा पता है,,
जब सबको रोटी देने वाला किसान, गोलियों से भूख मिटाता है,,
हाँ तब मैं कविता लिखता हूँ,
तब तब मैं कविता लिखता हूँ..!!
उम्मीद है इस भ्रष्ट समाज में परिवर्तन जल्द ही आएगा,,
अन्यथा मेरा भ्रष्टतंत्र से द्वंद पहले भी चलता था, आगे भी चलता जायेगा...!! (जय हिंद)-Dr. Ravi

मेरे देश की एक झलक

नव विहान का सूरज बनकर, चमके तेरा नाम,
मरे-जिएँ आँखों में झलके तेरा रूप ललाम,,

तुझमें खेले गाँधी गौतम,कृष्ण राम बलराम,
दिन मढ़ता है सोना तन पर, लाली मढ़ती शाम,,

छू न सके नापाक हाथ ये अपने चारों धाम,
रावण मार पधारे जैसे, आज अवध में राम,,

तेरा शहर स्वर्ग बन जाए, नंदनवन हो ग्राम,
तेरा नाम बढ़ाएँगे हम, होकर भी बदनाम,,

मेरी भारत माता मेरा, तुझको शत-शत बार प्रणाम..!! (जय हिंद)

Hindustaan Ke Sachhe Sapoot Ka JanmDin Aap Sabko Mubaarak Ho... #JaiHind

Wishing A Very #HappyBirthDay To My Role Model, Organizer Of #AzadHindFauj & A Great Patriot Of India
Born: January 23, 1897
Died: August 18, 1945 (For Me Not Yet)
Achievements: Passed Indian Civil Services Exam; elected Congress President in 1938 and 1939; formed a new party All India Forward block; organized Azad Hind Fauj to overthrow British Empire from India.

Subhas Chandra Bose, affectionately called as Netaji, was one of the most prominent leaders of Indian freedom struggle. Though Mahatma Gandhi and Jawaharlal Nehru have garnered much of the credit for successful culmination of Indian freedom struggle, the contribution of Subash Chandra Bose is no less. He has been denied his rightful place in the annals of Indian history. He founded Indian National Army (Azad Hind Fauj) to overthrow British Empire from India and came to acquire legendary status among Indian masses.

कुछ सवाल आप से..--

"""उत्तर प्रदेश.."""
"एक ऐसा राज्य जहाँ गंगा और यमुना धरती सीचती हैं,,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ बाढ़ के पानी में लोगों का भविष्य हर साल डूबता है..?"

"एक ऐसा राज्य जो देश भर को अनाज देने की छमता रखता है,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ का अन्नदाता अपनी भूख गोलियों से मिटाता है..?"

"एक ऐसा राज्य जहाँ संस्कृतियाँ अपना बसेरा बनती हैं,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ के गाँव अब शहर की जुग्गियों में अपना बसेरा खोज रहे हैं..?"

"एक ऐसा राज्य जिसने सदियों से दुनिया को शिक्षा दी,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ की शिक्षा आज खुद भिक्षा मांगने को मजबूर है..?"

"एक ऐसा राज्य जहाँ के उद्योग धंधे कभी देश का जीवन थे,, या एक ऐसा प्रदेश जहाँ कुटीर उद्योग भी आखिरी साँसे गिन रहे हैं..??"

क्या ये देखकर आपको गर्व महसूस होता है??? नहीं ना...
इसीलिए कहता हूँ, चुनाव धर्म या जाती के आधार पर न करें.. इंसानियत और राष्ट्र भक्ति को महत्त्व दें..!!

हे मनु के वंशज, तुम कब सुधरोगे?

जो छुपा ले गरीब के गम को,
हमने तो वो इंसान नहीं देखे..!!
कैसे जाती है बात घर से बाहर,
हमने तो दीवार के कान नहीं देखे..!!
मिटा दे जो सदियों की दुश्मनी दिलो से,
हमने तो वो गीता वो कुरान नहीं देखे..!!
अरे अभी भी संभल जाओ बद-दिमागों,
दावा करो होश की,
क्या सब के सर एक ही आसमान नहीं देखे..!!
न पकाओ नफरत की आग पे स्वार्थ की रोटी,इंसानियत रहने दो,
इस आग में जलते हुए मकान नहीं देखे..!!