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Showing posts from December, 2011

खोखली राजनीती का भंवर

दिलकश परदे लगे राज़ के रखवालों के, हाँ हमसब हैं चोर पूछ लो सरकारों से.. आशाओं के सभी किनारे लगे सरकने, गए माँगने लोग आसरे मजधारों से.. आये थे नेता जी घर पर प्यार बांटने, हमे बचा ही लेना दुश्मन..! इन यारों से.. एक तसल्ली के घर में हम ठहरे,, बेघर, आस लिए बैठे हैं अब तो इन्कारों से.. हम आवारा रूह तड़पकर चले ढूँढने, वो तन्हाई आज शोरों के बाजारों से.. आज अहिंसा के सायों में जले लोग ये, आये हैं इन्साफ माँगने तलवारों से.. एक गुलाबी फूल हाथ में लेकर राहुल, हाल पूछने चले दहशतों के मारों से…

Veena Ki Swayamvar Leela

कल रात को जब आखो में एक आँसू आया,
मैंने उससे पूछा तू बता बाहर क्यों आया,,
बेचारे ने सुबकते हुए अपना मुह खोला,
अगले ही क्षण बोला,,,
“इमेजिन वालों ने फिर से स्वयंवर सजाया है,
इस बार सर्कस के लिए वीणा मालिक को बुलाया है..
सोचकर दुखी होता हूँ इमेजिन की स्वयंवर लीला,,,
अब लोगों का चरित्र परीक्षण वो करेगी,
जिसका स्वयं ही है करेक्टर ढीला….”